सुनील कुशवाहा , नुमरेसी स्पेशलिस्ट 15 August 2026
गणित की एक अच्छी पाठ योजना का उद्देश्य केवल बच्चों से प्रश्न हल कराना नहीं है। बच्चों को संख्या और मात्रा का अर्थ समझना, अपनी गणितीय सोच व्यक्त करना, अलग-अलग रणनीतियों से हल करना, उत्तर की जाँच करना और गणित को दैनिक जीवन से जोड़ना भी सीखना चाहिए।
यदि गणित पढ़ाने के लिए प्रतिदिन लगभग 60 मिनट हैं, तो उस समय को चार उद्देश्यपूर्ण खंडों में बाँटा जा सकता है। यह 4 Block Approach for Mathematics पाठ को बातचीत से शुरू कर अभ्यास और खेल तक एक संगत क्रम देता है।

4 Block Approach क्या है https://youtu.be/nitHONlW3G4?si=41yrJxq55fhEkZTN?
गणित के एक दैनिक पाठ को चार खंडों में संगठित किया जा सकता है:
| खंड | समय | उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1. मौखिक गणित चर्चा (Oral Math Talk) | 8–10 मिनट | गणितीय भाषा, mental strategies और reasoning |
| 2. दक्षता शिक्षण (Skill Teaching) | 20–25 मिनट | learning outcome के अनुसार स्पष्ट, guided teaching |
| 3. दक्षता अभ्यास (Skill Practice) | 15–18 मिनट | कार्यपत्रक/पाठ्यपुस्तक के माध्यम से स्वतंत्र अभ्यास |
| 4. गणितीय खेल (Mathematical Games) | 10–12 मिनट | कौशल का आनंदपूर्ण प्रयोग और पुनरावृत्ति |
समय को बच्चों की जरूरत, कक्षा-स्तर और अवधारणा की जटिलता के अनुसार बदला जा सकता है।
4 Block Approach का व्यापक उद्देश्य: गणितीय प्रवीणता
4 Block Approach का उद्देश्य बच्चों को केवल प्रश्नों के सही उत्तर तक पहुँचाना नहीं, बल्कि गणितीय प्रवीणता (mathematical proficiency) विकसित करने में सहायता देना है। इसमें पाँच परस्पर जुड़े आयाम शामिल हैं—वैचारिक समझ (conceptual understanding), अर्थात संख्या, संक्रिया और संबंधों का अर्थ समझना; प्रक्रियात्मक प्रवाहिता (procedural fluency), अर्थात उचित विधि को सही, सटीक और लचीले ढंग से प्रयोग करना; रणनीतिक दक्षता (strategic competence), अर्थात गणितीय समस्याओं को समझना, प्रस्तुत करना और हल करने की योजना बनाना; तार्किक चिंतन या reasoning, अर्थात अपने हल का कारण देना, दूसरों की रणनीतियों को समझना और उत्तर की जाँच करना; तथा गणित के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति (positive disposition), अर्थात यह विश्वास विकसित करना कि गणित समझा जा सकता है, उपयोगी है और निरंतर प्रयास से सीखा जा सकता है। मौखिक चर्चा, स्पष्ट दक्षता-शिक्षण, स्वतंत्र अभ्यास और गणितीय खेल—ये चारों खंड मिलकर बच्चों को इन आयामों में आगे बढ़ने के अवसर देते हैं।
ब्लॉक 1: मौखिक गणित चर्चा (Oral Math Talk)
मौखिक गणित चर्चा का उद्देश्य बच्चों को केवल उत्तर बोलना नहीं, बल्कि गणित पर सोचना, तर्क करना, मानसिक रूप से गणित करना और अभिव्यक्त करने का कौशल विकसित करना है I
Oral Math Talk के उद्देश्य
- बच्चों को मौखिक रूप से गणित करने में सक्षम बनाना
- कक्षा में गणितीय चर्चा का वातावरण बनाना
- mental calculation और लचीली रणनीतियों का विकास करना
- गणितीय अवधारणाओं और प्रक्रियाओं पर reasoning विकसित करना
- गणित को बच्चों के दैनिक जीवन के अनुभवों से जोड़ना
शिक्षक क्या कर सकते हैं?
1. अवधारणा और प्रक्रिया पर चर्चा करें
प्रतिदिन एक छोटी theme चुनें। उदाहरण:
- “स्कूल आते समय तुमने कहाँ-कहाँ संख्याएँ देखीं?”
- “बस की सीट पर लिखी संख्या क्या बताती है?”
- “1, 2, 3, 4, 5… गिनते समय हर बार क्या बदल रहा है?”
- “उल्टी गिनती में हर अगली संख्या कितनी कम होती है?”
2. मानसिक गणना की रणनीतियों पर बात करें
बच्चों को प्रश्न दें, फिर उनके हल करने के तरीके सुनें। उदाहरण:
8 + 9 = ?
एक बच्चा 8 के बाद 9 संख्याएँ गिन सकता है। दूसरा 9 को 10 बनाने का तरीका चुन सकता है:
8 + 9 = 7 + 10 = 17
लक्ष्य बच्चों को उँगलियों के उपयोग से रोकना नहीं है; लक्ष्य यह है कि वे धीरे-धीरे गिनने के अलावा अधिक कुशल और अर्थपूर्ण रणनीतियाँ भी सीखें।
3. दैनिक जीवन के संदर्भ लें
- ₹35 कितने अलग-अलग नोटों और सिक्कों से बनाए जा सकते हैं?
- दुकान से सामान खरीदते समय कितना खर्च होगा?
- ₹50 में से ₹15 खर्च करने पर कितना बचेगा?
- घर या कक्षा में कौन-सी वस्तुएँ अधिक, कम या बराबर हैं?
NIPUN Bharat guidelines गणितीय संवाद, परिचित भाषा, प्रश्नों और बच्चों को अपने विचार व्यक्त करने के अवसर देने पर बल देती हैं। NIPUN Bharat Guidelines
ब्लॉक 2: दक्षता शिक्षण (Skill Teaching)
इस खंड में शिक्षक एक स्पष्ट learning outcome के आधार पर गतिविधि कराता है। गतिविधि का उद्देश्य बच्चे को गणितीय विचार तक पहुँचाना होना चाहिए, केवल उसे व्यस्त रखना नहीं। दक्षता शिक्षण की गतिविधि में ELPS अप्रोच, GRR, समस्या समाधान अप्रोच को बेहतर तरीके से एक शिक्ष्ण स्टेप में सम्मलित करके उपयोग करना है I
उदाहरण learning outcome
“बच्चे एक-अंकीय संख्याओं का जोड़ ठोस सामग्री, चित्र और गणितीय प्रतीकों की सहायता से हल करते हैं।”
उदाहरण: 6 + 8 पढ़ाने की गतिविधि: “रमा के पास ₹6 थे। उसकी माँ ने उसे ₹8 और दिए। अब रमा के पास कितने रुपये हैं?”बच्चों को सोचने और उत्तर देने दें। फिर पूछें: “तुमने इसे कैसे हल किया?”
आज के सीखने का उद्देश्य बताइए और फिर बच्चों के सवाल पूछें जोड़ से सम्बंधित जिससे पता चले की वे क्या कर सकते हैं और अपने पूर्व ज्ञान को सक्रीय कर सके I इसके बाद बच्चों के साथ सवाल की समझ पर चर्चा कीजिए और हल करके दिखाइए l इसमें जरुरी सामग्री का उपयोग कीजिए I चर्चा कीजिए जैसे –
- इसमें क्या दिया गया है?
- क्या पता करना है?
- क्या जोड़ना है या घटाना? क्यों?
- इसे वस्तुओं, चित्रों और अंकों में कैसे दिखाएँगे?
गणितीय रूप में कैसे लिखेंगे बच्चों से चर्चा कर दिखाइए
6 + 8 = ?
Counters, सिक्के, कंकड़ या ten-frame से दिखाइए। फिर “10 बनाओ” रणनीति पर चर्चा कीजिए:
6 = 4 + 28 + 2 = 1010 + 4 = 14
बच्चों को स्पष्ट कीजिए कि गिनकर हल करना एक तरीका है, लेकिन संख्या को तोड़कर 10 बनाना भी उपयोगी रणनीति है। फिर उनसे उत्तर की जाँच कराइए।
दक्षता शिक्षण के 10 आवश्यक चरण
ये चरण जोड़, घटाव, माप, आकार, पैटर्न या अन्य numeracy skills पढ़ाने में उपयोग किए जा सकते हैं।
- उस दिन का learning objective बच्चों को बताइए।
उदाहरण: “आज हम एक-अंकीय संख्याओं को जोड़ने के अलग-अलग तरीके सीखेंगे।” - गतिविधि शुरू करने से पहले एक गणितीय प्रश्न पूछिए और उत्तरों पर चर्चा कीजिए।
इससे बच्चों की पूर्व-समझ सामने आती है। - अवधारणा या प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से model कीजिए।
Think aloud, स्थानीय उदाहरण, चित्र, TLM, counters या number line का उपयोग करें। “कैसे?” और “क्यों?” वाले प्रश्न अवश्य पूछें। - बच्चों के साथ मिलकर नया प्रश्न हल कीजिए।
पूरे समूह या छोटे समूह में guided practice कराएँ। - बच्चों को व्यक्तिगत रूप से प्रश्न हल करने के लिए दीजिए।
इससे प्रत्येक बच्चे की समझ दिखती है। - बच्चों के काम का अवलोकन कीजिए, बातचीत कीजिए और feedback दीजिए।
कक्षा में घूमें; केवल उत्तर न देखें, उनकी रणनीति भी समझें। - बच्चों से अपने हल की स्वयं जाँच कराइए।
यह self-checking की आदत विकसित करता है। - बच्चों को अपना हल समझाने के लिए कहिए।
उदाहरण: “तुमने 14 तक कैसे पहुँचे?” - गणितीय हल पर ‘कैसे’ और ‘क्यों’ के प्रश्न पूछिए।
उदाहरण: “तुमने 6 और 8 को क्यों जोड़ा?” या “क्या इसे किसी दूसरे तरीके से हल कर सकते हैं?” - मुख्य गणितीय विचार का सारांश दीजिए और पूछिए—‘आज हमने क्या सीखा?’
उदाहरण: “जब योग 10 से अधिक हो, तो संख्या को तोड़कर 10 बनाना जोड़ने का एक उपयोगी तरीका हो सकता है।”
गलती को सीखने का अवसर बनाइए
यदि कोई बच्चा 8 + 9 = 16 लिखता है, तो केवल “गलत” न कहें। पूछें:
- “तुम 16 तक कैसे पहुँचे?”
- “क्या counters या number line से दोबारा जाँच सकते हो?”
- “क्या 9 को 10 बनाकर देखोगे?”
इस तरह बच्चे की सोच सामने आती है और वह अपनी गलती को समझकर सुधार सकता है।
ब्लॉक 3: दक्षता अभ्यास (Skill Practice)
दक्षता शिक्षण के बाद बच्चों को पाठ्यपुस्तक, कार्यपुस्तिका, कार्यपत्रक या बोर्ड पर दिए गए प्रश्न स्वतंत्र रूप से हल करने दें। यह block केवल लिखित काम नहीं है; यह शिक्षक के लिए formative assessment का अवसर भी है।
कार्यपुस्तिका पर काम शुरू करने से पहले
- बड़े समूह में प्रत्येक प्रश्न का निर्देश पढ़ें।
- बच्चों को सरल भाषा में निर्देश समझाएँ।
- जरूरत हो तो एक उदाहरण प्रश्न साथ में हल करें।
- यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को पता हो: प्रश्न क्या पूछ रहा है और उत्तर कैसे दिखाना है।
कार्य के दौरान
- बच्चों से प्रश्न स्वयं हल करने को कहें।
- कक्षा में घूमकर देखें कि वे क्या कर रहे हैं।
- जरूरत पड़ने पर संकेत दें, पर पूरा उत्तर न बताएं।
- जिन बच्चों को सहायता चाहिए, उनसे छोटा प्रश्न पूछें या TLM से दोबारा समझाएँ।
- तेज़ी से काम पूरा करने वाले बच्चों को “दूसरा तरीका बताओ” या “अपना कहानी-प्रश्न बनाओ” जैसा विस्तार कार्य दें।
कार्य के बाद
- कुछ बच्चों से अपना हल और तरीका समझाने को कहें।
- कठिन प्रश्नों को पूरे समूह के साथ फिर से हल करें।
- उत्तर के साथ रणनीति पर भी चर्चा करें।
- अगली कक्षा की योजना के लिए नोट करें: किन बच्चों को किस अवधारणा में अतिरिक्त सहायता चाहिए।
ब्लॉक 4: गणितीय खेल (Mathematical Games)
गणितीय खेल पाठ का अलग, मनोरंजक अंत नहीं, बल्कि सीखी गई दक्षता को दोहराने और लागू करने का अवसर है। NCF-FS 2022 में teacher-planned structured play में गणितीय खेलों को दैनिक रूप से शामिल करने का उल्लेख है। NCF-FS: Play-based learning
खेल: “रुको या जाओ”
यह खेल जोड़ और घटाव का अभ्यास कराने के लिए उपयोगी है।
सामग्री: पासा, स्कोर लिखने के लिए कागज़/बोर्ड
नियम:
- एक लक्ष्य संख्या तय करें, जैसे 15।
- बच्चों को छोटे समूहों में बाँटें।
- हर समूह बारी-बारी से पासा फेंके।
- पासे पर आए अंक को अपने पिछले योग में जोड़ें।
- जिसका योग सबसे पहले ठीक 15 हो जाता है, वह जीतता है।
- यदि योग 15 से अधिक हो जाए, तो अगली बारी में पासे पर आए अंक को अपने योग से घटाएँ।
खेल के बाद पूछें
- “तुम्हारा योग 13 था; 15 तक पहुँचने के लिए कितना चाहिए था?”
- “तुम्हारा योग 16 हो गया; अब क्या करोगे?”
- “क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे अनुमान लगा सको कि पासा फेंकने पर रुकना बेहतर है या आगे बढ़ना?”
खेल को कक्षा के स्तर के अनुसार सरल या चुनौतीपूर्ण बनाया जा सकता है—लक्ष्य संख्या 10, 20 या 50 रखी जा सकती है; पासे की जगह संख्या कार्ड भी उपयोग किए जा सकते हैं।
4 Block Approach में शिक्षक के लिए त्वरित जाँच-सूची
पाठ के अंत में अपने आप से पूछें:
- क्या आज बच्चों ने गणित पर बात की?
- क्या learning outcome के अनुरूप teaching activity हुई?
- क्या बच्चों को वस्तु, चित्र और प्रतीक के बीच संबंध दिखा?
- क्या सभी बच्चों को स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने का अवसर मिला?
- क्या मैंने बच्चों के तरीकों और गलतियों का अवलोकन किया?
- क्या खेल सीधे आज की गणितीय दक्षता से जुड़ा था?
- क्या बच्चे बता सके कि उन्होंने आज क्या सीखा?
निष्कर्ष
4 Block Approach for Mathematics एक उपयोगी daily lesson-plan structure है। यह शिक्षक को याद दिलाता है कि foundational numeracy में बातचीत, स्पष्ट teaching, स्वतंत्र अभ्यास और खेल—चारों की भूमिका है। पाठ को मौखिक गणित चर्चा से शुरू करके गणितीय खेल पर समाप्त करने से बच्चों को सोचने, बोलने, दिखाने, हल करने और आनंद के साथ दोहराने के अवसर मिलते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि योजना बच्चों की जरूरत के अनुसार बदले। किसी भी ढाँचे की सफलता इस बात में है कि वह शिक्षक को अधिक संवेदनशील, लचीला और बच्चों की गणितीय सोच के प्रति सजग बनाए।
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